Saturday, 26 August 2023

निखिलं नवतः चरमं  दशतः

 "निखिलं नवतः चरमं दशतः" एक संस्कृत श्लोक है, जिसका अर्थ होता है, "सब कुछ नौ के आस-पास होता है, लेकिन दस में छिपा होता है"। इसका मतलब है कि अक्सर कुछ महत्वपूर्ण या महत्वहीन चीजें हमारी दृष्टि में नहीं आतीं, लेकिन वास्तव में हमारे जीवन में महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

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